इंजीनियरिंग ग्रेजुएट और बीएड क्यों नहीं बन सकते शिक्षक
इंजीनियरिंग ग्रेजुएट और बीएड क्यों नहीं बन सकते शिक्षक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व एनसीटीई से पूछा है कि मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग में स्नातक और प्रशिक्षित बीएड डिग्रीधारक माध्यमिक विद्यालयों में अध्यापक क्यों नहीं बन सकते हैं।
यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र ने मुरादाबाद की श्वेता चौहान की ओर से दाखिल याचिका पर अधिवक्ता क्षितिज शैलेंद्र को सुनकर दिया। कोर्ट ने सरकार से यह भी बताने को कहा है कि विज्ञापन में पद की अर्हता स्नातक या उसके समकक्ष डिग्री के साथ बीएड को रखा गया है तो इंजीनियरिंग डिग्री धारकों को किस आधार पर अयोग्य ठहराया जा रहा है।
एडवोकेट क्षितिज शैलेंद्र ने कोर्ट को बताया कि याची इंजीनियरिंग डिग्रीधारक व बीएड है। वर्ष 2014 में माध्यमिक विद्यालयों के एलटी ग्रेड अध्यापकों की नियुक्ति का विज्ञापन प्रकाशित हुआ, जिसमें गणित/विज्ञान के अध्यापक के लिए निर्धारित योग्यता गणित/विज्ञान में स्नातक या समकक्ष डिग्री के साथ बीएड रखी गई। याची ने भी आवेदन किया। उसकी काउंसिलिंग कर उसे योग्य भी माना गया लेकिन नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया और दो साल बाद यह कहकर अयोग्य करार दे दिया गया कि याची निर्धारित योग्यता नहीं रखती।
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