यूपी बोर्ड भी बनाएगा मोबाइल एप
यूपी बोर्ड भी बनाएगा मोबाइल एप
धर्मेश अवस्थी, इलाहाबाद : यूपी बोर्ड हाईटेक होने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। बोर्ड क
धर्मेश अवस्थी, इलाहाबाद : यूपी बोर्ड हाईटेक होने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। बोर्ड की मंशा मोबाइल एप के जरिए परीक्षार्थी व छात्र-छात्राओं तक सूचनाएं तेजी से पहुंचाना है, ताकि पंजीकरण कराने, परीक्षा फार्म भरने व पाठ्यक्रम में हुए बदलाव की घर बैठे जानकारी मिल जाए। परीक्षा कार्यक्रम, रिजल्ट जैसी तमाम जानकारियां एप के जरिए मोबाइल पर ही मिल सकेंगी।
माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड इधर लगातार हाईटेक हो रहा है। यहां कक्षा 9 एवं 11 के छात्र-छात्राओं का पंजीकरण ऑनलाइन होता है और हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के परीक्षा फार्म भी ऑनलाइन ही भरे जा रहे हैं। ऐसे ही यूपी बोर्ड की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने वाले व प्रायोगिक परीक्षाओं के परीक्षक भी ऑनलाइन आवेदन के जरिए बनाए जा रहे हैं। यूपी बोर्ड मोबाइल एप की दिशा में बढ़ाने जा रहा है, क्योंकि तकनीक का साथ मौजूदा समय में जरूरी है और बोर्ड में लाखों परीक्षार्थियों की संख्या को देखते हुए जरूरत भी है। इससे सूचनाओं की गति तेज होगी।
असल में शैक्षिक सत्र की शुरुआत से लेकर परीक्षा व परिणाम जारी होने तक यूपी बोर्ड में सूचनाएं जारी होती रहती हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक एवं संबंधित कालेज पर ही पूरी निर्भरता रहती है। हालांकि इधर बोर्ड की वेबसाइट से तमाम अद्यतन जानकारियां आसानी से मिल रही हैं, लेकिन मोबाइल एप सबसे कारगर रहेगा। उधर, परिषद सचिव शैल यादव कहती हैं कि धन का प्रबंध होते ही इस दिशा में आगे बढ़ेंगे।
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पंजीकरण शुल्क से सुधरेगी दशा
यूपी बोर्ड ने चालू शैक्षिक सत्र से पंजीकरण एवं परीक्षा शुल्क आदि में बढ़ोतरी की है। पंजीकरण शुल्क के 50 रुपये में से 10 रुपये विद्यालय खाता, 20 रुपये राजकीय कोषागार एवं इतने ही रुपये परिषद सचिव के खाते में जमा होना है। अभी तक परिषद सचिव को अलग से खाता संचालन की शासन से अनुमति नहीं मिली है। माना जा रहा है अनुमति मिलते ही धन का प्रबंध हो जाएगा।
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परीक्षा में फेल हुआ मोबाइल एप
यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के दौरान परीक्षा मोबाइल एप का संचालन होना था, लेकिन वह एक दिन भी नहीं चल सका। असल में इसके जरिए परीक्षार्थियों की हाजिरी जांची जानी थी उसका पहले प्रयोग कराए बगैर एकदम से लागू किया गया इससे वह फेल हो गया। इसमें केंद्र प्रभारी एवं शिक्षकों ने भी असहयोग किया था।
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