कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही हाथ आएगा फायदा
कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही हाथ आएगा फायदा
कैबिनेट की बैठक में सातवां वेतन आयोग लागू करने का निर्णय भले ही हो गया है, लेकिन इसका फायदा हाथ आने में अभी वक्त लगेगा। जब तक सरकार की ओर से उच्च स्तरीय जांच कमेटी विसंगतियों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर देती है, तब तक सातवें वेतन आयोग के नोटिफिकेशन की भी कोई उम्मीद नहीं है। वित्त मंत्रालय की ओर से भी पत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया गया है कि कर्मचारियों की मांगों पर कमेटी गठित कर दी गई है। इस पर सुझाव आने के बाद ही सरकार कोई निर्णय लेगी।
वैसे तो सातवें वेतन आयोग के तहत कई विसंगतियों में सुधार की मांग की जा रही है, लेकिन सबसे प्रमुख मुद्दा न्यूनतम वेतन से जुड़ा है। सरकार ने न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये निर्धारित किया है जबकि कर्मचारी 24 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग कर रहे हैं। सैद्धांतिक तौर पर न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी होगी तो फिटमेंट फार्मूला भी बढ़ेगा और इससे हर ग्रेड के कर्मचारी के वेतन में वृद्धि होगी। गत छह जुलाई को गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ हुई कर्मचारी नेताओं की बैठक में यह मुद्दा प्रमुख रूप से छाया रहा।
बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी विसंगतियों, खासकर न्यूनतम वेतन एवं फिटमेंट फार्मूले में संशोधन के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा। यह कमेटी अधिकतम चार माह में अपनी रिपोर्ट देगी। आल इंडिया ऑडिट एंड एकाउंट एसोसिएशन के पूर्व सहायक महासचिव हरिशंकर तिवारी का कहना है कि वित्त मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट कर दिया गया है कि चार माह के भीतर कमेटी अपनी रिपोर्ट दे देगी, सो कर्मचारियों और पेंशनरों को नवंबर तक फायदा हाथ आने का इंतजार करना होगा। कमेटी की रिपोर्ट में सरकार न्यूनतम वेतन में जो भी वृद्धि करेगी, सैद्धांतिक रूप से उसी अनुपात में फिटमेंट फार्मूला बढ़ेगा और हर ग्रेड के कर्मचारी एवं पेंशनर को इसका फायदा मिलेगा।
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